ज़िन्दगी ख्वाब है – Zindagi Khwaab Hai (Mukesh, Jagte Raho)

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पढ़िए ज़िन्दगी ख्वाब है – Zindagi Khwaab Hai (Mukesh, Jagte Raho) लिरिक्स | अधिक जानकारी गीत के बारे में:

फ़िल्म का नाम: जागते रहो (1956)
गीत के संगीत कार है: सलिल चौधरी
गीत के गीतकार है: शैलेन्द्र
इस गीत को गया है: मुकेश

ज़िन्दगी ख्वाब है
ख्वाब में झूठ क्या
और भला सच है क्या
सब सच है

दिल ने हमसे जो कहा, हमने वैसा ही किया
फिर कभी फुरसत से सोचेंगे, बुरा था या भला
ज़िन्दगी ख्वाब है…

एक कतरा मय का जब, पत्थर के होठों पर पड़ा
उसके सीने में भी दिल धड़का, ये उसने भी कहा, क्या
ज़िन्दगी ख्वाब है…

एक प्याली भर के मैंने, गम के मारे दिल को दी
ज़हर ने मारा ज़हर को, मुर्दे में फिर जान आ गयी
ज़िन्दगी ख्वाब है…



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