दो घड़ी बहला गई – Do Ghadi Behla Gayi (Bhupinder Singh, Yeh Nazdeekiyan)

पढ़िए दो घड़ी बहला गई – Do Ghadi Behla Gayi (Bhupinder Singh, Yeh Nazdeekiyan) लिरिक्स | अधिक जानकारी गीत के बारे में:

फ़िल्म का नाम: ये नज़दीकियाँ (1982)
गीत के संगीत कार है:
रघुनाथ सेठ
गीत के गीतकार है: गणेश बिहारी श्रीवास्तव
इस गीत को गया है: भूपिंदर सिंह

दो घड़ी बहला गयीं परछाईयाँ
फिर वही गम है, वही तन्हाईयाँ, तन्हाईयाँ
दो घड़ी बहला गयीं…

रसमसाता जिस्म पूनम की छटा
ये घनेरे बाल सावन की घटा
तुम जो हँसकर बादलों को देख लो
बिजली लेने लगे अंगड़ाईयाँ
फिर वही गम है…
दो घड़ी बहला गईं…

जो भी इन आँखों में खोया खो गया
जो तुम्हारा हो गया, बस हो गया
डूबने वाला न फिर उभरा कभी
उफ़ निगाहें नाज़ की गहराईयाँ
फिर वही गम है…
दो घड़ी बहला गयी…

तुम मेरी दुनिया मेरा ईमां भी हो
तुम मेरी हसरत, तुम्हीं अरमां भी हो
तुम जो हो तो हर तरफ संगीत है
तुम नहीं तो ज़हर है शहनाईयाँ
फिर वही गम है…
दो घड़ी बहला गई…



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